The Balance Breaker

🤝🤝🤝🤝 I am out in the open,Staring plants and trees,Enjoying the cool breeze,Away from city’s squeeze. But why am I scared?Why does it feel so weird?Breathing out of fear,Even when no other human near. Dear plants and trees—A blessing you have been,Grateful I am for every breath,And the oxygen you release. But how do IContinue reading “The Balance Breaker”

जंगल में निवेश – कविता

भोली भाली चीची आई, डरते डरते मां को समाचार बताई— “जिस पेड़ पर रहते हैं हम, जिस पर खाते, खेला करते हरदम, उस पेड़ को काटेगा कोई।” कहते-कहते खूब वो रोई। चीची की मांँ गई थोड़ी डर, बोली, “परिवार है पेड़ पर निर्भर।” “ना सिर्फ मेरा या पड़ोसी का, जंंगल है तो जीवन है हरContinue reading “जंगल में निवेश – कविता”